बलात्कार का आरंभ कब हुआ ?


लेखक: ज्ञानेन्द्र

बलात्कार करने को राजनैतिक-सत्ता द्वारा मान्यता देने, इस घिनोने काम को प्रोत्साहन देने और उसे सही ठहराने का आरंभ कब हुआ ? यौन अपराध किसकी देन है? आखिर भारत जैसे देवियों को पूजने वाले देश में बलात्कार की गन्दी मानसिकता कहाँ से आयी ?

आखिर क्या बात है कि जब प्राचीन भारत के रामायण, महाभारत आदि लगभग सभी हिन्दू-ग्रंथ के उल्लेखों में अनेकों लड़ाईयाँ लड़ी और जीती गयीं, परन्तु विजेता सेना द्वारा किसी भी स्त्री का बलात्कार होने का जिक्र नहीं है? तब आखिर ऐसा क्या हो गया कि आज के आधुनिक भारत में बलात्कार रोज की सामान्य बात बन कर रह गयी है ?

श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त की; पर न ही उन्होंने और न उनकी सेना ने पराजित लंका की स्त्रियों को हाथ लगाया। महाभारत में पांडवों की जीत हुयी, लाखों की संख्या में योद्धा मारे गए। पर किसी भी पांडव सैनिक ने किसी भी कौरव सेना की विधवा स्त्रियों को हाथ तक न लगाया।

अब आते हैं ईसापूर्व इतिहास में ! 220-175 ईसापूर्व में यूनान के शासक “डेमेट्रियस प्रथम” ने भारत पर आक्रमण किया। 183 ईसापूर्व के लगभग उसने पंजाब को जीतकर साकल को अपनी राजधानी बनाया और पंजाब सहित सिन्ध पर भी राज किया। लेकिन उसके पूरे समयकाल में बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।

इसके बाद “युक्रेटीदस” भी भारत की ओर बढ़ा और कुछ भागों को जीतकर उसने “तक्षशिला” को अपनी राजधानी बनाया। वहां भी बलात्कार का कोई जिक्र नहीं। “डेमेट्रियस” के वंश के मीनेंडर (ईपू 160-120) ने नौवें बौद्ध शासक “वृहद्रथ” को पराजित कर सिन्धु के पार पंजाब और स्वात घाटी से लेकर मथुरा तक राज किया । परन्तु उसके शासनकाल में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।

“सिकंदर” ने भारत पर लगभग 326-327 ई .पू आक्रमण किया जिसमें हजारों सैनिक मारे गए । इसमें युद्ध जीतने के बाद भी राजा “पुरु” की बहादुरी से प्रभावित होकर सिकंदर ने जीता हुआ राज्य पुरु को वापस दे दिया और “बेबिलोन” वापस चला गया। विजेता होने के बाद भी “यूनानियों” (यवनों) की सेनाओं ने किसी भी भारतीय महिला के साथ बलात्कार नहीं किया और न ही “धर्म परिवर्तन” करवाया ।

इसके बाद “शकों” ने भारत पर आक्रमण किया (जिन्होंने ई.78 से शक संवत शुरू किया था)। “सिन्ध” नदी के तट पर स्थित “मीनानगर” को उन्होंने अपनी राजधानी बनाकर गुजरात क्षेत्र के सौराष्ट्र, अवंतिका, उज्जयिनी, गंधार, सिन्ध, मथुरा समेत महाराष्ट्र के बहुत बड़े भू भाग पर 130 ईस्वी से 188 ईस्वी तक शासन किया। परन्तु इनके राज्य में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं।

इसके बाद तिब्बत के “युइशि” (यूची) कबीले की लड़ाकू प्रजाति “कुषाणों” ने “काबुल” और “कंधार” पर अपना अधिकार कायम कर लिया। जिसमें “कनिष्क प्रथम” (127-140ई.) नाम का सबसे शक्तिशाली सम्राट हुआ। जिसका राज्य “कश्मीर से उत्तरी सिन्ध” तथा “पेशावर से सारनाथ” के आगे तक फैला था। कुषाणों ने भी भारत पर लम्बे समय तक विभिन्न क्षेत्रों में शासन किया। परन्तु इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि इन्होंने भारतीय स्त्रियों का बलात्कार किया हो ।

इसके बाद “अफगानिस्तान” से होते हुए भारत तक आये “हूणों” ने 520 AD के समयकाल में भारत पर अधिसंख्य बड़े आक्रमण किए और यहाँ पर राज भी किया। ये क्रूर तो थे परन्तु बलात्कारी होने का कलंक इन पर भी नहीं लगा।

इन सबके अलावा भारतीय इतिहास के हजारों साल के इतिहास में और भी कई आक्रमणकारी आये जिन्होंने भारत में बहुत मार काट मचाई जैसे “नेपालवंशी” “शक्य” आदि। पर बलात्कार शब्द भारत में तब तक शायद ही किसी को पता था।

अब आते हैं मध्यकालीन भारत में, जहाँ से शुरू होता है इस्लामी आक्रमण; और यहीं से शुरू होता है भारत में बलात्कार का प्रचलन।

सबसे पहले 711 ईस्वी में “मुहम्मद बिन कासिम” ने सिंध पर हमला करके राजा “दाहिर” को हराने के बाद उसकी दोनों “बेटियों” को “यौनदासियों” के रूप में “खलीफा” को तोहफा भेज दिया। इसका पूरा विवरण “छाछ नामा” किताब में लिखा है जोकि एक मुसलिम लेखक ने ही लिखी है। (देखिये: हिस्ट्री आफ इंडिया एज टोल्ड बाइ इट्स ओन हिस्टोरियन, खन्ड एक, पृष्ठ 173, 181, 210 ) यह एक दर्दनाक घटना थी, जो भारत की नारियों ने पहली बार देखी थी। अपने पिता की हत्या और अपनी दुर्दषा का बदला लेते हुए राजा दाहिर की दोनो बेटियों ने मुहम्मद बिन कासिम को खलीफा के हाथो मरवाया और खुद भी मर गई।

तब शायद भारत की स्त्रियों का पहली बार बलात्कार जैसे कुकर्म से सामना हुआ जिसमें “हारे हुए राजा की बेटियों” और “साधारण भारतीय स्त्रियों” का “जीती हुयी इस्लामी सेना” द्वारा बुरी तरह से बलात्कार और अपहरण किया गया ।

फिर आया 1001 इस्वी में “गजनवी”। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने “इस्लाम को फ़ैलाने” के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था। “सोमनाथ के मंदिर” को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों “हिन्दू औरतों” का बलात्कार किया । फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर “बाजारों में बोलियाँ” लगाकर “जानवरों” की तरह “बेच” दिया ।

फिर “गौरी” ने 1192 में “पृथ्वीराज चौहान” को हराने के बाद भारत में “इस्लाम का प्रकाश” फैलाने के लिए “हजारों काफिरों” को मौत के घाट उतार दिया और उसकी “फौज” ने “अनगिनत हिन्दू स्त्रियों” के साथ बलात्कार कर उनका “धर्म-परिवर्तन”करवाया।

मुहम्मद बिन कासिम से लेकर सुबुक्तगीन, बख्तियार खिलजी, जूना खाँ उर्फ अलाउद्दीन खिलजी, फिरोजशाह, तैमूरलंग, आरामशाह, इल्तुतमिश, रुकुनुद्दीन फिरोजशाह, मुइजुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूद, नसीरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, जलालुद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर खिलजी, कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी, नसरत शाह तुगलक, महमूद तुगलक, खिज्र खां, मुबारक शाह, मुहम्मद शाह, अलाउद्दीन आलम शाह, बहलोल लोदी, सिकंदर शाह लोदी, बाबर, नूरुद्दीन सलीम जहांगीर और अपने हरम में “8000 रखैलें रखने वाला शाहजहाँ”; इसके आगे अपने ही दरबारियों और कमजोर मुसलमानों की औरतों से अय्याशी करने के लिए “मीना बाजार” लगवाने वाला “जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर”; मुहीउद्दीन मुहम्मद से लेकर औरंगजेब तक बलात्कारियों की ये सूची बहुत लम्बी है, जिनकी फौजों ने हारे हुए राज्य की लाखों “हिन्दू महिलाओं” “(माल-ए-गनीमत)” का बेरहमी से बलात्कार किया और “जेहाद के इनाम” के तौर पर कभी वस्तुओं की तरह “सिपहसालारों” में बांटा तो कभी बाजारों में “जानवरों की तरह उनकी कीमत लगायी” गई।

ये असहाय और बेबस महिलाएं “हरमों” से लेकर “वेश्यालयों” तक में पहुँची। इनकी संतानें भी हुईं पर वो अपने मूलधर्म में कभी वापस नहीं पहुँच सकीं।

ये दुश्कर्म भारत मे ही नही, बहुत से दूसरे देशों मे भी किये गये और पुराने समय मे ही नही किये गये, बल्कि यह आज भी कई तरह से जारी हैं। अभी कल की ही बात है जब ईराक के कुरदिस्तान मे संजर पर्वत के पास “बगदादी खलीफा” की जिहादी सेना ने “यज्दी” कोम की औरतों पर योन-दुराचार के जुल्म ढाये, उनकी आम जनता के बीच नीलामी की, उनको अपने सैनिकों मे बांटा और उनका बलात्कार किया। यू ट्यूब उनकी दुखभरी दास्तानो से भरा पडा है, जिनको देख कर किसी भी इन्सान की आत्मा सिहर उठेगी।

यह 21वी सदी सच्चाई पर आधारित होनी चाहिये, मनघड॔त झूठे इतिहास पर नही। पहली आवश्यक्ता इस सत्य को स्वीकार करने की है । इसके बाद आवश्यक्ता इस बात की गारंटी करना है कि आगे कोई भी लोग यह जुर्म न कर सकें। “जिहादी धार्मिक कर्तव्य” के नाम पर स्त्री जाति के खिलाफ इस तरह के योन दुराचार को जडमूल से समाप्त कर देना चाहिय। इसके लिये पूरी दुनिया को एकजुट होना होगा।

2 Comments (+add yours?)

  1. Trackback: Electing Parliament: The On-line Way (2) | Indian People's Congress
  2. मुहम्मद इमरान
    Mar 16, 2020 @ 19:56:15

    लेख को पढ़ कर आभास होता है कि एक मनोविकारी ने बीसवी सदी में उन्नीसवे पुराण “भगवा-पुराण” की रचना की है, जिसमें लेखक ने कपोल कल्पनाओ, घृणित-कुन्ठित भावनाओ,अवधारणाओं व विकृत मानसिकता को उकेरने की चेष्टा की है ! धर्म व इतिहास को पढ़े – समझे बिना एवं कुत्सित उद्देश्य से लेख में उनका समावेश करना एसा ही है जैसे…………
    बाबा गोरखनाथ,गुरू नानक देव व संत कबीर को देवभूमि मगहर के एक मंच पर एक साथ बैठ कर मंत्रणा करने का स्वप्न देखना……..!

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