काश्मीर – नेहरू की नालायकी को 2019 में कैसे सुधारा गया ?


लेखक: अज्ञात

आज 31 अक्टूबर 2019 है और आज काश्मीर के तीनो हिस्सों – जम्मू, लद्दाख और घाटी – का भारत मे कानूनी रूप मे विलय हो गया है। आज वह गलती जो जवाहरलाल नेहरू ने 1947 मे की थी उसको भारत ने 72 साल बाद सुधार लिया है। यह कोई आसान काम नही था। अब काश्मीर का भारत मे विलय एक इतिहास बन चुका है।  अब इसके एक भाग बालिटस्तान गिलगित आदि के विलय का काम बाकि बचा है। हम पीछे मुड कर इस ऐतिहासिक घटना को भूतकाल के परिपेक्ष मे समझें।

मेरे विचार से मोदी सरकार ने सबसे बड़ा जुआ खेला था पीडीपी से समर्थन वापस लेकर मुफ्ती सरकार गिराने का।

अगर काँग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी को जरा भी भनक होती या अंदेशा होता कि मोदी सरकार को अगले आम चुनावों में इतना प्रचण्ड जनादेश मिलेगा और 370 हटा दी जाएगी, वे एक साथ आकर सरकार बनाने का दावा पेश कर देते और राज्य में राज्यपाल शासन नहीं लग पाता।

370 हटाने की जो शर्त थी कि राष्ट्रपतिजी से 370 हटाने की अनुशंसा राज्य की विधानसभा को करनी होगी वो शर्त पूरी नहीं होती। क्योंकि पीडीपी नेशनल कॉन्फ्रेंस कभी भी यह अनुशंसा नहीं करते। यही वह शर्त थी जिसके भरोसे कश्मीरी लीडर फुदकते थे कि केंद्र में कितनी भी मजबूत सरकार हो 370 हटा नहीं सकती। उन्हें विश्वास था कि कश्मीर में किसी की भी सरकार बने, विधानसभा से 370 हटाने की अनुशंसा कभी होगी ही नहीं।

भाजपा का पीडीपी के साथ गठबंधन बहुतो को रास नहीं आया था। लेकिन इस गठबंधन का फायदा भाजपा को यह हुआ कि उन्हें मुफ़्ती के क्षीण जनाधार की जानकारी मिल गयी और साथ ही भाजपा के साथ जाने की वजह से पीडीपी अब्दुल्ला और काँग्रेस के लिए अछूत हो गयी। अब्दुल्ला और कांग्रेस दोनों को लगा कि भाजपा की साथी रही पार्टी को अगर अभी सपोर्ट किया तो उनका मुस्लिम वोट बैंक नाराज हो जाएगा। इसी वजह से भाजपा की समर्थन वापसी के बाद दोनों ही दलों ने पीडीपी से किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना को नकार दिया। यही 370 खत्म होनेकी नींव पड़ गयी थी।

भाजपा की इस स्ट्रेटेजी को न मूर्ख काँग्रेस, न घमंडी महबूबा और न लालची अब्दुल्ला समझ पाया। और उनकी इन्ही मूर्खता का लाभ भारत को मिला।

हम जहाँ सोचना बन्द करते है, मोदी सरकार उसके 5 किलोमीटर आगे से सोचना शुरू करती है। मोदी को समझना मुश्किल ही नही नामुमकिन है ।

धारा 370 वैसे तो जम्मू-कश्मीर सरकार की अनुमति के बगैर हट नही सकती। पर मोदी फवरी में SC ST AMENDMENT BILL से कश्मीर में कानून बना चुके थे कि अगर कश्मीर में चुनी हुई सरकार न हो तो गवर्नर सारे निर्णय ले सकते है ।

ये बिल जब पास हो रहा था तब मूर्ख विपक्ष को ये पता ही नही चला कि मोदी ये क्यों कर रहे हैं ! आरक्षण की बात थी इस लिये विपक्ष ने बड़े जोश से इस बिल का समर्थन किया, पर आरक्षण के बहाने मोदी ने गवर्नर को सारे हक्क दे दिए ।

जब 370 धारा हट रही थी तब पता चला कि मोदीजी ये गेम कब से सेट कर रहे थे ! और धारा 370 हटाने से दो दिन पहले UAPA बिल पास किया, मतलब अगर कोई अड़ंगा डालेगा तो सीधा जेल जाएगा ।

यह था Check and Mate !

धारा 370 हटानेकी नींव 2014 से रखी गयी थी, पूरे घटनाक्रम में महबूबा मुफ्ती की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उसने मोदी से हाथ मिला कर कश्मीर में अपनी सरकार बनाई ।

मोदी को बहाना चाहिए था राष्ट्रपति शासन लगानेके लिए, जो महबूबा की गलतियों की वजह से लगा दिया गया । जो अब लाइफ टाइम रहेगा । अगर महबूबा कोंग्रेस से हाथ मिलाती तो शायद ये संभव न होता।

मोदी के बिछाए शतरंज के इस खेल में सारे प्यादे एक एक करके गिरते गए, आखिरमें बची रानी के लिए वजीर ही काफी था । यह खेल जरूरी था क्योकि –

द्वंद कहाँ तक पाला जाए,
युद्ध कहाँ तक टाला जाए,
तू भी है राणा का वंशज,
फेंक जहाँ तक भाला जाए ,
दोनों तरफ़ लिखा हो भारत,
सिक्का वही उछाला जाए.!

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