बथुआ: यह शाकाहार गुणों की खान


मोहम्मद मन्नान, एडवोकेट, उच्चतम न्यायालय

बथुआ सबसे अच्छा आहार है जिसे अँग्रेजी में Lambs Quarter कहा जाता है और जिसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium Elbum है।

बथुआ का साग और रायता बना कर अनादि काल से खाया जाता जा रहा है। लेकिन बहुत कम ही लोगों को यह बात मालूम होगा कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक, शिल्प शास्त्र में लिखा है कि हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए प्लस्तर में बथुआ मिलाते थे। स्त्रियां सिर से जूँ व रूसी (डैंड्रफ) साफ करने के लिए बथुआ के पानी से बाल धोया करती थीं। बथुआ गुणों की खान है।

बथुआ में कौन-कौन से विटामिन और मिनरल्स हैं?

बथुवा विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और विटामिन C से भरपूर है तथा बथुवे में कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर 43 Kcal होती है।

जब बथुआ मट्ठा, लस्सी या दही में मिला दिया जाता है तो यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बन जाता है। साथ में बाजरे या मक्के की रोटी, मक्खन व गुड़ की डली हो तो इसकी तुलना नहीं हो सकती किसी भोजन से।

जब हम बीमार होते हैं तो आजकल डॉक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली ही खाने की सलाह देते हैं। गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर विटामिन बी, सी व लौह तत्व के लिए गोली बताई जाती है। लेकिन बथुआ में वो सब कुछ है। बथुआ पहलवानों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक और बच्चों से लेकर बूढ़ों तक केलिए अमृत समान है।इसका साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है। गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है।

बथुआ के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए उत्तम औषधि है। बथुआ का सेवन कम से कम मसाले डालकर करना चाहिए। नमक नहीं मिलाया जाए तो ज्यादा अच्छा है। स्वाद के लिए मिलाना पड़े तो काला नमक ठीक होता है और देशी गाय के घी से छौंक लगाना चाहिए। बथुआ का उबाला हुआ पानी पीना अच्छा लगता है तथा इसका दही में बनाया हुआ रायता स्वादिष्ट होता है। किसी भी तरह से बथुआ नित्य सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है। बथुआ में जिंक होता है जो कि शुक्राणुवर्धक होता है और जिस्मानी कमजोरी को भी दूर कर देता है। बथुआ कब्ज दूर करता है। पेट साफ रहने पर तो कोइ भी बीमारी शरीर में लगेगी ही नहीं जिससे ताकत और स्फूर्ति बनी रहती है।

इस मौसम में नित्य इसकी सब्जी खाना चाहिए। बथुआ का रस या इसका उबाला हुआ पानी पीएँ तो और यह खराब लीवर को भी ठीक कर देता है। पथरी हो तो एक गिलास कच्चे बथुआ के रस में शक्कर, चीनी नहीं, मिलाकर नित्य पिया जाए तो पथरी टूटकर बाहर निकल आती है।

स्त्रियों के मासिक चक्र रुका हुआ हो तो दो चम्मच बथुआ के बीज को एक गिलास पानी में उबाला जाए और आधा रहने पर छानकर पी जाने पर खुलकर साफ हो जाता है। आँखों में सूजन या लाली हो तो प्रतिदिन बथुआ की सब्जी खाना चाहिए। पेशाब के रोगी को चाहिए कि आधा किलो बथुआ को तीन ग्लास पानी में उबाले और फिर पानी को छान कर और फिर उबले हुए बथुआ को निचोड़कर, उससे भी पानी को निकालकर, छाने हुए पानी में मिला लें। स्वाद के लिए नींबू, जीरा, थोड़ी सी काली मिर्च और काला नमक मिला कर पीए।

हमारे पूर्वज कहा करते थे कि हमने तो सारी उम्र अंग्रेजी दवा की एक गोली भी नहीं ली। उनके स्वास्थ्य व ताकत का राज बथुआ भी रहा होगा। घरों की रंगाई से लेकर खाना व दवा बनाने तक में बथुआ काम आता है। यह सिर के बालों के लिए प्राकृतिक शम्पू भी है।

लेकिन अफसोस है कि हम ये बातें भूलते जा रहे हैं और इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने अपने खेतों में जहर डालते जा रहे हैं। तथाकथित कृषि वैज्ञानिकों (अंग्रेज व काले अंग्रेज) ने बथुआ को भी कोंधरा, चौलाई, सांठी, भाँखड़ी आदि जैसे सैकड़ों आयुर्वेदिक औषधियों को खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया है और हम समझ भी नहीं पाये।

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